Our prime minister is falsely luring poor in name of providing Awas because corruption is rampant and those having money can manage


संदर्भ संख्या : 40019923008686 , दिनांक - 24 Apr 2023 तक की स्थिति

आवेदनकर्ता का विवरण :

शिकायत संख्या:-40019923008686

आवेदक का नाम-Yogi M. P. Singh

विषय-महोदय प्रकरण का संबंध मीनाक्षी देवी पत्नी छन्नू से है सिकरौड़ी विकासखंड जमालपुर जनपद मिर्जापुर श्रीमान जी आवास की सूची संतृप्त नहीं हुई उसके पहले ही आवास प्लस की सूची खंड विकास अधिकारी जमालपुर द्वारा बना दी गई इससे बड़ा भ्रष्टाचार क्या हो सकता है जिसका स्थान सूची में तीसरे नंबर पर था पूर्व खंड विकास अधिकारी के रिपोर्ट के अनुसार उस पात्र लाभार्थी को दरकिनार करके अपात्रों को आवास दिया गया क्या इसकी कभी जांच कराएगी योगी आदित्यनाथ जी की ईमानदार सरकार श्रीमान जी जब तक कमीशन खोरी रूपी भ्रष्टाचार विभाग से समाप्त नहीं होगा इस तरह से आवास की सूची आवास प्लस की सूची बनते रहेंगे और पात्र लाभार्थियों तक सरकारी सहायता कभी भी नहीं पहुंचेगी इसके लिए व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है क्या इस बात की जांच की जाएगी की मीनाक्षी देवी पत्नी छन्नू को अभी तक आवास क्यों नहीं दिया गया जबकि उनका नाम पात्रों की सूची में तीसरे स्थान पर था वह भी 3 वर्ष पहले उनका नाम पात्रों की सूची से क्यों हटाया गया किस अधिकारी ने हटाया किस कर्मचारी ने हटाया उसके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही होना चाहिए जांच करके उसको जेल भेजा जाना चाहिए क्योंकि उसके द्वारा घूस लेकर सूची में हेराफेरी की गई है जोकि परिस्थित जन्य प्रमाणो से प्रमाणित है सिद्ध है। श्रीमान जी प्रकरण का संबंध मीनाक्षी देवी पत्नी छन्नू से है ना कि मीनाक्षी देवी पत्नी स्वर्गीय भरत से इसलिए आप मीनाक्षी देवी पत्नी स्वर्गीय भारत की बात ना करें रिपोर्ट में क्योंकि इस ढंग का रिपोर्ट भ्रमित करने वाला होता है हर गरीब को छत का वादा पूरा करके चुनावी मैदान में उतरेगी मोदी सरकार जाब्यू, नई दिल्ली आगामी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरने से पहले I मोदी सरकार उस उपलब्धि का प्रमाण-पत्र अपने हाथ में रखना चाहती है, जो करोड़ों आवासहीनों का अपनी छत का सपना पूरा करने जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए समयसीमा तो दिसंबर, 2024 तय की गई थी, पर अब राज्यों से इस जगति से काम करने को कहा गया है। कि लक्ष्य दिसंबर, 2023 तक ही प्राप्त कर लिया जाए। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग तीन करोड़ लाभार्थियों के लक्ष्य में 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हैं। भाजपा सरकार ने केंद्र की सत्ता में आसीन होने के बाद वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शुरू की थी। पहले इसे 2022 तक ही पूरा किया जाना निर्धारित था, पर कोविड महामारी के असर के चलते अगस्त, 2022 में केंद्रीय कैबिनेट ने इसकी समयसीमा को 31 दिसंबर, दिसंबर तक लक्षित सभी 2.94 करोड़ ग्रामीण आवासहीनों को आवास देने की तैयारी प्रधानमंत्री आवास योजना के 60 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से 2. 18 करोड़ आवासों का निर्माण पूरा, बाकी के लिए राज्यों को निर्माण तेज करने को कहा 2024 तक के लिए बढ़ा दिया। हालांकि, सरकार का जोर इस बात पर है कि 'सभी को आवास' के लक्ष्य वाले इस महत्वाकांक्षी मिशन को 2024 के लोस चुनाव से पहले ही पूरा किया जाए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के पोर्टल पर दर्ज आंकड़े के मुताबिक, कुल 2,94,03,462 आवासों का लक्ष्य है जिनमें से 2, 18,67,542 आवास बन चुके हैं। पिछले दिनों ही मंत्रालय की ओर से राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर कहा है कि आवास स्वीकृति को समयसीमा बढ़ाई जा चुकी है, जो अंतिम बार हैं। अब लक्ष्य के सापेक्ष स्वीकृति लंबित न रहे। इसी तरह भूमिहीनों के आवास के लिए भूमि की औपचारिकता 31 मार्च तक पूरी कर ली जाए। दिसंबर, 2023 तक लक्ष्य प्राप्ति को पाक्षिक रणनीति पर जोर देते हुए केंद्र द्वारा सभी राज्यों के साथ एक दौर की वीडियो कान्फ्रेंसिंग भी की जा चुकी है। यदि इतनी संख्या में गरीबों को आवास मिल जाते हैं तो भाजपा सरकार लोकसभा चुनावों में इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करना चाहेगी। पहले से ही दलित और पिछड़ों पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी भाजपा की नजर उस आंकड़े पर भी है जिसके मुताबिक योजना के कुल लाभार्थियों में 60 अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के, 25 अन्य व 15 लाभार्थी अल्पसंख्यक वर्ग के हैं।

Department -ग्राम्‍य विकास विभागComplaint Category -

नियोजित तारीख-24-05-2023शिकायत की स्थिति-

Level -जनपद स्तरPost -परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण

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Beerbhadra Singh

To write blogs and applications for the deprived sections who can not raise their voices to stop their human rights violations by corrupt bureaucrats and executives.

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