Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>

माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय से सादर अनुरोध है की निरीह बच्चो से कुलपति और रजिस्ट्रार द्वारा अपरोक्ष वसूला गया करोडो रूपया वापस कराया जाय क्योकि यह मूल अधिकारों का हनन है |
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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>6 December 2017 at 01:14
To: supremecourt <supremecourt@nic.in>
Cc: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>
Bcc: cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, csup@up.nic.in, Registrar MGKVP <registrarmgkvp@gmail.com>, vcmgkvp@gmail.com, lokayukta@hotmail.com
Hon'ble apex court of India may consider the sheer violation of fundamental /human rights of thousands of poor students pursuing higher studies.

An application under Article 32 of Constitution of India, in order to be instrumental in providing the social justice to thousands of students who are being subjected to exploitation by tyrant accountable public staffs of M.G.K.V.P. University Varanasi because of mismanagement in the system.

To

                           Hon’ble chief justice of India /companion judges

                                 Supreme court of India, New Delhi, India

Subject-Article 32, the constitution of India, right to Justice but this right of a large number of poor students was wholly eroded by concerned arbitrarily.

Most revered Sir –Your applicant invites the kind attention of Hon’ble Sir with due respect to following submissions as follows.

1-It is submitted before the Hon’ble Sir that विश्वविद्यालय की आख्या - प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ५०० विश्वविद्यालय में महाविद्यालय से  जमा कराया जाता है और विश्वविद्यालय द्वारा अग्रसारण शुल्क अधिकतम २०० रुपये प्रति परीक्षार्थी निर्धारित है महाविद्यालय द्वारा परीक्षार्थियों से अग्रसारण शुल्क लिया जाता है | 

श्री  मान जी एक तरफ विश्वविद्यालय जहा विश्वविद्यालय परिसर के छात्रों से प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ५०० ले रहा है वही सम्बद्ध महाविद्यालयों के छात्रों से प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ७०० वसूला गया और अपरोक्ष रूप में  करोडो रुपये की अवैध वसूली की गयी जो की छात्रों के संबैधानिक अधिकारों का हनन है | श्री मान जी विश्वविद्यालय परिसर और सम्बद्ध महाविद्यालय के छात्रों में भेद भाव कैसा | अगर विश्वविद्यालय चाहता तो ऑनलाइन पेमेंट ले सकता था  और उसका किसी छात्र के गार्जियन पर अधिकतम बोझ रूपया १५ होता किन्तु ऐसा नहीं किया जा रहा है भारी भरकम बिरोध के बावजूद सभी अपने हित साधने में जुटे है | 
2
-It is submitted before the Hon’ble Sir that
​ ​
Central Government Act
Article 14 in The Constitution Of India 194914. Equality before law The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India Prohibition of discrimination on grounds of religion, race, caste, sex or place of birth
.

Whether a student can be arbitrarily charged Rs.200.00 merely in the name of the student of affiliated college as not having privileges of being the student of the campus of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University Varanasi? Whether such discrimination may be allowed in this largest democracy in the world? 
3-It is submitted before the Hon’ble Sir that
 
A V Dicey stated three principles to the term 'Rule of Law'.

1. Supremacy of Law 2. Equality before Law 3. Predominance of Legal spirit

. Where is equality 
before
the law if the students of affiliated colleges will be targeted by erring staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi? Under which law of the land,
 
accountable public staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi delegated the arbitrary powers to principals of affiliated colleges to extort Rs. 200 per student?
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-It is submitted before the Hon’ble Sir that
 

Supremacy of Law

  • 'Supremacy of Law' is the central and most characteristic feature of Common Law.
  • Law is the absolute supreme and predominant as opposed to influence of arbitrary power or discretionary power.

Equality before Law

  • There must be equality before the law or equal subjection of all classes to the ordinary law.
  • All people should be subject to one and the same law.
               
  •  5
    -It is submitted before the Hon’ble Sir that
     
    51A. Fundamental duties It shall be the duty of every citizen of India (a) to abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem;(h) to develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform;
    (i) to safeguard public property and to abjure violence;
    (j) to strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavor and achievement
    .
                       
      This is a humble request of your applicant to you Hon'ble Sir that It can never be justified to overlook the rights of the citizenry by delivering services in an arbitrary manner by floating all set up norms. This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap the benefit of loopholes in the system and depriving poor citizens of the right to justice. Therefore it is need of the hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system. For this, your applicant shall ever pray you, Hon'ble Sir.

                                              Yours sincerely

                                Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911

    Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road District-Mirzapur, Uttar Pradesh, India.
  • Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>23 November 2018 at 22:18
    To: supremecourt <supremecourt@nic.in>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, vcmgkvp@gmail.com, pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, REGISTRAR MGKVP <registrar.mgkvp@gmail.com>

    फीडबैक की स्थिति:
    अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव द्वारा दिनाक 31/10/2018 को प्राप्त आख्या अनुमोदित कर दी गयी है
    Answer already   given no any answer required.
    श्री मान जी उपरोक्त जवाब महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ स्टाफ द्वारा दिया जा रहा है |
    उपरोक्त आंग्ल वाक्य का हिन्दी रूपांतरण है -जवाब पहले ही दिया जा चुका कोई और जवाब शेष नही है |
    श्री मान जी अब इनका जवाब देखे -
    अवगत कराना है विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों के माध्यम से व्यक्तिगत परीक्षार्थियो परीक्षा आवेदन पत्र अग्रसारित कराया जाता है शिकायतकर्ता इंटरमीडिएट में लिए गये विषयों के आधार पर स्नातक स्तर पर विषयों का चयन करता है | इंटरमीडिएट स्तर पर केवल इतिहास विषय के रूप में एक ही विषय का चयन किया जा सकता है | उच्च शिक्षा में आवेदन करने के पूर्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी पाठ्यक्रम या संस्था में प्रवेश लेने के पूर्व इसकी पूरी जानकारी प्राप्त करने की जिम्मेदारी परीक्षार्थी की होगी | हस्ताक्षरित सहायक कुलसचिव / नोडल कोऑर्डिनेटर डा राकेश मिश्र दिनांक ०१ फ़रवरी २०१८ आख्या संलग्न है |
    उपरोक्त द्वारा ०३-जनवरी २०१८ को प्रस्तुत आख्या -अवगत कराना है की विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित विषय पुंज के द्वारा कोई भी परीक्षार्थी बी. ए. में इतिहास प्राचीन इतिहास और मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास में से कोई एक विषय का ही चयन कर सकता है |
    श्री मान जी अब प्रार्थी का जवाब देखे -श्री मान जी रागिनी पाण्डेय का महाविद्यालय द्वारा अग्रसारित व विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत परीक्षा फॉर्म प्रत्यावेदन के साथ संलग्न है |
    रागिनी पाण्डेय को बी.एस. सी. प्रथम वर्ष में जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और रसायन विज्ञान दिया गया है जब की रागिनी पाण्डेय इंटरमीडिएट में गणित की छात्रा थी और उन्होंने कभी भी इंटरमीडिएट जीव विज्ञान और  वनस्पति विज्ञान में उत्तीर्ण नही की है |
    बहुत हास्यास्पद है की महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ में योग्य स्टाफ का इस कदर अकाल पड गया है की आंग्ल भाषा में लिखे प्रत्यावेदनो की विषय वस्तु तक नही समझ पाते है| भगवान भरोसे विश्वविद्यालय चला रहे है |

    Grievance Status for registration number : PMOPG/E/2018/0492774
    Grievance Concerns To
    Name Of Complainant
    Yogi M P Singh
    Date of Receipt
    18/10/2018
    Received By Ministry/Department
    Prime Ministers Office
    Grievance Description
    श्री मान जी यदि कोई ऐसा लोकसेवक जो मेरे प्रत्यावेदनो पर कार्यवाही करने में सक्षम हो सिर्फ १५ मिनट मेरी बात सुने और इमानदारी से उस पर कार्यवाही करे प्रार्थी शुल्क वापसी के लिए कभी भी नही कहेगा अन्यथा इस आराजकता से मृत्यु पर्यन्त संघर्ष जारी रहेगा गोरे तो चले गये काले अभी भी बाकी है
    श्री मान जी प्रार्थी को जिन विषयो में एडमिट कार्ड जारी किया गया उनमे एग्जाम की व्यवस्था क्यों नही की गई जब की प्रार्थी के द्वारा ५० से भी ज्यादा आवेदन प्रार्थना पत्र भेजे गये श्री मान जी प्रार्थी को धोखा दिया गया और उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया क्यों की प्रार्थी दलित वर्ग का है बहुत आश्चर्य है की वर्ष भर तक प्रार्थी के किसी भी शिकायत का जवाब तक नही दिया गया यह है भ्रस्टाचार का आलम श्री मान जी प्रार्थी कर्ज ले कर फीस जमा किया था किन्तु प्रार्थी अब वह फीस वापस चाहता है यदि लेशमात्र भी इमानदारी है तो प्रार्थी का कम से कम शुल्क तो वापस कर दी जिएश्री मान जी एडमिट कार्ड जारी करने वाला महात्मा गाँधी कशी विद्यापीठ का वह स्टाफ क्यों दोषी नही है जिसने एक ऐसा फॉर्म स्वीकार किया जो यूनिवर्सिटी द्वारा तय मानदंडो को पूरा नही कर रहा था

    महात्मा गाँधी कशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय का वेबसाइट वह फॉर्म और एंट्रीज़ और पूर्व फील्ड एंट्रीज़ उपलब्ध कराया जो इसके मानक को पूरा नही कर रहा था जो वेबसाइट पर उपलब्ध थे स्टूडेंट ने उन्ही का चुनाव किया था श्री मान जी भरा हुआ फॉर्म मानक के अनुसार नही था तो फीस क्यों स्वीकार की गई जो की विद्यार्थी द्वारा दो दिन पश्चात जमा की गई थी
    Grievance Document
    Current Status
    Case closed
    Date of Action
    03/06/2022
    Remarks
    DSWO Mirzapur Office ................................ ................................ ...............................
    Rating
    1
    Poor
    Rating Remarks
    Think about the gravity of situation that our prime minister is known as the messiah of the people among the masses of this country but the grievances submitted before his office redressed in five years . This Grievance has been closed by the concerned mandate without any conclusion and observation made regarding the grievance. It is quite obvious that this grievance has been sent by the learnt staff of the Government of Uttar Pradesh to different public authority and on the basis of the report of different public authority this grievance has been closed submitted before the office of great prime minister Narendra Damodar Modi. Think about the vulnerability of the innocent and Gullible citizenary of this largest democracy in the world who cannot understand the alterior designs of our political stalwars and corrupt public functionaries including administrative field and judiciary. Whether such lawlessness and anarchy may be considered as the good governance as claimed by few political
    Officer Concerns To
    Officer Name
    Shri Bhaskar Pandey (Joint Secretary)
    Organisation name
    Government of Uttar Pradesh
    Contact Address
    Chief Minister Secretariat , Room No. 321, U.P. Secretariat, Lucknow
    Email Address
    bhaskar.12214@gov.in
    Contact Number
    05222226350