High court directed to get civil remedy for settlement of title dispute by taking shelter in appropriate civil court but police took it under teeth

 


संदर्भ संख्या : 40015722025761 , दिनांक - 17 Jun 2022 तक की स्थिति

आवेदनकर्ता का विवरण :

शिकायत संख्या:-40015722025761

आवेदक का नाम-Dinesh Pratap Singhविषय-यह जिला जज लखनऊ का प्रेक्षण है दिनेश प्रताप सिंह के अपीली प्राथना पत्र पर प्रार्थी द्वारा दिनांक १३ अक्टूबर २०१९ को जिला जज लखनऊ को प्रेषित प्रत्यावेदन / कम्युनिकेशन के सम्बन्ध में सूचना मांगी गयी है की छाया प्रति संलग्नक दो के रूप में इस अपील मेमो के साथ प्रस्तुत की गयी है जिसके परिशीलन से स्पस्ट होता है उक्त प्रत्यावेदन माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या १३५/२००६ आराधना सिंह जरिये सचिव होम डिपार्टमेंट उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ में पारित आदेश दिनांक ०७ मार्च २००६ के तारतम्य में प्रस्तुत किया गया है याचिका में माननीय न्यायालय ने आराधना सिंह उर्फ गुड्डी द्वारा प्रस्तुत हैबियस कारपस याचिका को आदेश में दिए गए प्रेक्षण के साथ अंतिम रूप से निस्तारित किया है इसमें माननीय न्यायालय ने सम्बंधित आराधना सिंह द्वारा प्रस्तुत आधारों पर इसे अबैध परिरोध का प्रकरण नहीं पाया और यह आदेश पारित किया कि  याची को घर से बाहर जाने की अनुमति रहेगी और वहा प्रत्यर्थी संख्या ४ ता ७ दरवाजे के लॉक को खोलेंगे ताकि वह उपयुक्त अनुतोष के लिए बाहर आ सके इस प्रत्यावेदन में प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह द्वारा छह बिंदु लिए गए है जो मुख्यतः अनुराधा सिंह उर्फ गुड्डी के क्रिया कलापो और थाना आशियाना की पुलिस से सम्बंधित है यह भी परिलक्षित होता है की प्रार्थी के विरुद्ध अपराध संख्या २६९/२००९ अंतर्गत धारा ४२० ,४४८,४०६ भा. द. वि. थाना आशिआना जिला लखनऊ से सम्बंधित कोई आपराधिक प्रकरण न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय लखनऊ में रहा है जिसके सम्बन्ध में प्रार्थी ने सम्बंधित न्यायालय में माननीय उच्च न्यायालय के उक्त आदेश दिनांक ०७ मार्च २००६ का उल्लेख किया है संलग्नको का अवलोकन करे Assistant public information officer Cantt repeatedly provided information that Ashiana police acted under the direction of the court as Anuradha Singh name changed Aradhana Singh submitted petition before the court under sub section 3 of section 156 of the criminal panel code and court gave the direction to register first information report in the matter after investigation. This implies that Ashiana police station which  was the party number 3 in the high court case overlooked the verdict passed by the Lucknow bench are the high court of Judicature at Allahabad and followed the direction of the lower court by overlooking the verdict of the High court which was binding on  the Ashiana police, home secretary and commissioner of police as home secretary was the party number 1, commissioner of police was the party number 2 and Ashiana police was the party number 3 in the case in which honourable high court of Judicature at Allahabad decided the verdict. Consequently entire police personnel who abused their post and position must be subjected to the penal proceedings of the law of land for violating the verdict passed by the Lucknow bench of the high court of judicature at Allahabad. Undoubtedly lower court Lucknow had passed the order to register the first information report but it did not say to overlook the verdict delivered by the Lucknow bench of the High court of judicature at Allahabad and this blunder was done by Ashiana police itself. Now the time has come when the Lucknow police may correct their stand by taking the action against the wrongdoer police personnel who committed wrong by disobeying the order passed by the Lucknow bench of the high court of judicature at Allahabad. Think about the gravity of situation that when a single fish can make dirty entire water of the pond then think about a Syndicate of corrupt police personnel is working in the department of police in the commissionerate Lucknow so what would be outcome if no  action will be taken by the accountable public function

विभाग -पुलिसशिकायत श्रेणी -

नियोजित तारीख-18-06-2022शिकायत की स्थिति-

स्तर -पुलिस आयुक्तपद -पुलिस आयुक्त

प्राप्त रिमाइंडर-

प्राप्त फीडबैक -दिनांक19-05-2022 को फीडबैक:-श्री मान जी प्रार्थी द्वारा दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए अनुरोध किया गया है अब समय आ गया है कि लखनऊ पुलिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा पारित आदेश की अवहेलना कर गलत कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही कर अपना पक्ष ठीक करे तत्कालीन आशियाना थानाध्यक्ष कल्याण सिंह सागर और उनके कनिष्ठों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का जो मखौल उड़ाया गया उसके लिए प्रार्थी दंड निर्धारित कराना चाहता है किन्तु डॉ अर्चना सिंह किसी भी शिकायत को बिना पढ़े ही तोते की तरह जनसुनवाई पोर्टल पर, जनसूचना आवेदनों और जनशिकायतों में तिथि बदल बदल कर एक ही रिपोर्ट लगाया है ऐसा प्रतीत होता की उन्हें कुछ समझ में ही नहीं आता है अब तो जिला व सत्र न्यायाधीश लखनऊ का टिप्पड़ी संलग्न है जो हिंदी में है जिसको सहायक पुलिस आयुक्त आसानी से समझ सकती है किन्तु ऐसा प्रतीत होता है की उनके पास ड्यूटी के लिए समय नहीं रहता है इसलिए उन्होंने संलग्नक देखा ही नहीं श्री मान तत्कालीन आशियाना थानाध्यक्ष कल्याण सिंह सागर और उनके कनिष्ठों के विरुद्ध प्रार्थी द्वारा कोई मुकदमा अभी तक नहीं किया गया था किन्तु प्रार्थी द्वारा उनके विरुद्ध मुक़दमा पंजीकृत कराना चाहता है उसी क्रम में यह शिकायत की गयी है जिससे उचित जांच करके दोषियों की जिम्मेदारी तय हो सके उम्मीद है की प्रकरण फीडबैक के उपरांत वरिष्ठ रैंक अधिकारी के पास जाएगा और उनके स्तर से उपरोक्त दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी ऐसी अपेक्षा है प्रार्थी का

फीडबैक की स्थिति -

संलग्नक देखें -Click here

नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश दिनांक आदेश आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति आपत्ति देखे संलगनक

1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 19-04-2022 क्षेत्राधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त-क्षेत्राधिकारी कैंट ,जनपद-लखनऊ 19-05-2022 janch ahakhya salgan hi निस्तारित

2 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 19-05-2022 शिकायतकर्ता द्वारा असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त होने पर उच्च अधिकारी को पुनः परीक्षण हेतु प्रेषित. पुलिस आयुक्त-लखनऊ 20-05-2022 आख्या संतोषजनक है अनुमोदित निस्तारित

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