संदर्भ संख्या : 40014922018539, दिनांक - 17 Oct 2022 तक की स्थिति

आवेदनकर्ता का विवरण :

शिकायत संख्या:-40014922018539

आवेदक का नाम-विमल कुमार रस्ताेगी

विषय-श्रीमान जी संलग्न प्रार्थना पत्र के आधार पर जिले की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को मेरे व मेरे परिवार की सुरक्षा व्यवस्था करने के साथ ही मेरी सम्पत्ति व घर के आगे खाली जगह पर कब्जा व अतिक्रमण करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही करने का आदेश देने की कृपा करें। प्रार्थी एक वृद्ध व बुजुर्ग व्यक्ति है। न्याय की आशा में श्रीमान जी को यह प्रार्थना पत्र दे रहा है।

Department -पुलिसComplaint Category -

नियोजित तारीख-05-09-2022शिकायत की स्थिति-

Level -थाना स्तरPost -थानाध्‍यक्ष/प्रभारी नि‍रीक्षक

प्राप्त रिमाइंडर-

प्राप्त फीडबैक -दिनांक17-09-2022 को फीडबैक:-शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया की शिकायत पर अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही से असंतुस्ट है,अधिकारी द्वारा कोई जाँच नही की जा रही है,गलत रिपोर्ट लगाई गई है,समस्या बनी हुई है, कृपया शिकायत उच्च लेवल अधिकारी को भेजी जाए ,

फीडबैक की स्थिति -

संलग्नक देखें -Click here

नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी अग्रसारित दिनांक आदेश आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति आपत्ति देखे संलगनक

1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 29-08-2022 थानाध्‍यक्ष/प्रभारी नि‍रीक्षक-कोतवाली,जनपद-बदायूं,पुलिस 04-09-2022 श्रीमान जी उक्त प्रार्थना पत्र की जांच आख्या सलंग्न है । निस्तारित

2 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 17-09-2022 शिकायतकर्ता द्वारा असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त होने पर उच्च अधिकारी को पुनः परीक्षण हेतु प्रेषित. क्षेत्राधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त-बदायूँ,जनपद-बदायूं 17-09-2022 आख्या श्रेणी - वाद-न्यायालय में विचाराधीन है / स्थगित है

आवेदक एवं विपक्षी दिनेश गुप्ता के मकान एक दूसरे के बराबर में स्थित हैं तथा दोनों के मकानों के पास स्थित जमीन पर कब्जा करने को लेकर दोनों पक्षों के मध्य विवाद है । उक्त प्रकरण में स्थानीय पुलिस द्वारा दोनों पक्षों को बुलाकर फैसले का प्रयास किया गया है, परन्तु दोनों पक्ष कोई सहमत नहीं है । उक्त प्रकरण जमीन विवाद से सम्बन्धित है, जिसके सम्बन्ध में दोनों पक्षों द्वारा न्यायालय में वाद दायर किया जाना बताया गया है । अतः ऐसी स्थिति में वर्तमान में पुलिस स्तर से किसी पुलिस कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है । निस्तारित