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Beerbhadra Singh <myogimpsingh@gmail.com>

PMOPG :: Online Grievance Registration
1 message

PMOPG <cpgrams-darpg@nic.in>Tue, May 31, 2022 at 1:46 PM
To: myogimpsingh@gmail.com
Dear Sir/Madam,

Your Communication has been registered with registration number: PMOPG/E/2022/0146453.

For more details please visit https://pgportal.gov.in/status.
Please quote the registration number in your future correspondence.

Note: This is a system generated email. Please do not reply to it.


संदर्भ संख्या : 40019922011958 , दिनांक - 31 May 2022 तक की स्थिति

आवेदनकर्ता का विवरण :

शिकायत संख्या:-40019922011958

आवेदक का नाम-Lalit Mohan Kaseraविषय-Registration Number DGPOF/R/2022/60352 Name Lalit Mohan Kasera Date of Filing 16/05/2022Status REQUEST TRANSFERRED TO OTHER PUBLIC AUTHORITY as on 17/05/2022Details of Public Authority :- SUPERINTENDENT OF POLICE OFFICE MIRZAPUR. vide registration number :- SPMZR/R/2022/80004 respectively. Note:- Further details will be available on viewing the status of the above-mentioned new request registration number. More feedback is attached herewith. श्री मान जी उपरोक्त जनसूचना आवेदन आंग्ल भाषा में है इसलिए उसका हिंदी अनुवाद दे रहा हूँ शिकायत संख्या:-40019922010610 माननीय क्षेत्राधिकारी महोदय के यहां लंबित है हमे उम्मीद है की आप लोगो को समझ में आएगा क्योकि प्रकरण मातृ भाषा में भी उपलब्ध है  आवेदक का नाम-Lalit Mohan Kasera विषय-सभी जानते हैं कि सी आर पी.सी की धारा 151/107/116 के तहत कार्यवाही. केवल निवारक उपाय हैं और शुद्ध आपराधिक कार्यवाही नहीं हैं, बल्कि  ऐसी कार्यवाही अर्ध न्यायिक प्रकृति की हैं, जबकि मेरे बेटे का अपराध शुद्ध आपराधिक कार्यवाही को आमंत्रित कर रहा है, इसलिए मेरा मामला भारतीय दंड विधान की धारा 151/107/116 के तहत नहीं हल किया जा सकता है डी.जी.पी. कार्यालय उत्तर प्रदेश राज्य में पुलिस विभाग का निगरानी प्रमुख है जिसके माध्यम से राज्य सरकार राज्य में कानून व्यवस्था की निगरानी और पालन सुनिश्चित करती है। यह डीजीपी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि  लोगों के अधिकारों की रक्षा और देश  के कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सदैव तत्पर रहे  पुलिस अधीक्षक कार्यालय मिर्जापुर में पीआईओ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 की उपधारा 1 के तहत निर्धारित समय के भीतर मांगी गई बिंदुवार जानकारी प्रदान कर सकता है। 1-माननीय पुलिस अधीक्षक जिला-मिर्जापुर पीड़ित आवेदक को बता सकते हैं कि क्या 21 मार्च 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 323/504 के तहत 31/22 के रूप में पंजीकृत एनसीआर को सीआरपीसी की धाराओं में कैसे समाप्त किया जा सकता है। धारा 151/107/116 जो अपराध निवारक उपाय हैं? इसका तात्पर्य यह है कि संबंधित पुलिस और सर्कल अधिकारी का निष्कर्ष और अवलोकन स्वयं अनुचित है और देश  के कानून के विपरीत सक्षम वरिष्ठ रैंक अधिकारी द्वारा ठीक किया जाना चाहिए। कृपया उसी दिन पीड़ित के हजरत इमाम युसूफ संभागीय अस्पताल में किए गए एक्स-रे रिपोर्ट की एक प्रति उपलब्ध कराएं। 2-सीआरपीसी की  धारा 151  पुलिस की शक्ति है जो पुलिस द्वारा अपराध  निवारक कार्रवाई पर विचार करने वाला एक प्रावधान है। उक्त प्रावधान के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा अपराध करने से पहले ही उस अपराध को रोकने के लिए  पुलिस अधिकारी द्वारा लागू किया जा सकता है। 151. संज्ञेय अपराध करने से रोकने के लिए गिरफ्तारी। (1) किसी भी संज्ञेय अपराध को करने के लिए एक डिजाइन बनाने  वाले को  एक पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना, इस तरह के डिजाइन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, अगर यदि  अधिकारी को ऐसा प्रतीत होता है कि अपराध के कमीशन को अन्यथा रोका नहीं जा सकता है तो इस प्रावधान का प्रयोग किया जाता है । सीआर, पी.सी. की धारा 107/116 तब लागू किया जाता है जब शांति भंग की आशंका होती है, परिणामस्वरूप ये दो धाराएं भी निवारक उपाय हैं जो उपरोक्त पुलिस की अक्षमता और भ्र्ष्टाचार को दर्शाती हैं। कृपया सरकार द्वारा जारी परिपत्र, अधिसूचना, कार्यालय ज्ञापन प्रदान करें जो एन.सी.आर की परिणति अपराध निवारक प्रावधान में करने का समर्थन करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 323/504 के तहत और मुक़दमा संख्या  31/22 के रूप में पंजीकृत  अपराध को Cr.P.C की धाराओं के तहत 151/107/116 में परिणित करना जो अपराध निवारक उपाय हैं किस तरह से न्यायोचित है । 3-क्या पीड़ित की मेडिकल जांच रिपोर्ट पुलिस की जांच के अधीन है, निस्संदेह नहीं, अपराधियों द्वारा पीड़ित को गंभीर चोटें कैसे पहुंचाई जा सकती हैं. क्या पुलिस की विश्वसनीयता पर कोई संदेह नहीं है क्योंकि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। पुलिस कोई न्यायाधीश नहीं है जो अ

विभाग -पुलिसशिकायत श्रेणी -

नियोजित तारीख-30-06-2022शिकायत की स्थिति-

स्तर -क्षेत्राधिकारी स्तरपद -क्षेत्राधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त

प्राप्त रिमाइंडर-

प्राप्त फीडबैक -दिनांक को फीडबैक:-

फीडबैक की स्थिति -

संलग्नक देखें -Click here

नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अग्रसारित विवरण :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी प्राप्त/आपत्ति दिनांक नियत दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश स्थिति

1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 31-05-2022 30-06-2022 क्षेत्राधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त-क्षेत्राधिकारी , नगर ,जनपद-मिर्ज़ापुर,पुलिस अनमार्क

जनसुनवाई

समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश

सन्दर्भ संख्या:-  40019922011958

लाभार्थी का विवरण

नाम Lalit Mohan Kasera पिता/पति का नाम Kallu Ram Kasera

मोबइल नंबर(१) 9452634200 मोबइल नंबर(२)

आधार कार्ड न. ई-मेल

पता ललित मोहन कसेरा पुत्र स्वर्गीय कल्लू राम कसेरा पता-पैरिया टोला, बर्फ वाली गली , पुलिस स्टेशन-कोतवाली कटरा सिटी पोस्ट ऑफिस, तहसील सदर ,जिला मिर्ज़ापुर

आवेदन पत्र का ब्यौरा

आवेदन पत्र का संक्षिप्त ब्यौरा Registration Number DGPOF/R/2022/60352 Name Lalit Mohan Kasera Date of Filing 16/05/2022Status REQUEST TRANSFERRED TO OTHER PUBLIC AUTHORITY as on 17/05/2022Details of Public Authority :- SUPERINTENDENT OF POLICE OFFICE MIRZAPUR. vide registration number :- SPMZR/R/2022/80004 respectively. Note:- Further details will be available on viewing the status of the above-mentioned new request registration number. More feedback is attached herewith. श्री मान जी उपरोक्त जनसूचना आवेदन आंग्ल भाषा में है इसलिए उसका हिंदी अनुवाद दे रहा हूँ शिकायत संख्या:-40019922010610 माननीय क्षेत्राधिकारी महोदय के यहां लंबित है हमे उम्मीद है की आप लोगो को समझ में आएगा क्योकि प्रकरण मातृ भाषा में भी उपलब्ध है  आवेदक का नाम-Lalit Mohan Kasera विषय-सभी जानते हैं कि सी आर पी.सी की धारा 151/107/116 के तहत कार्यवाही. केवल निवारक उपाय हैं और शुद्ध आपराधिक कार्यवाही नहीं हैं, बल्कि  ऐसी कार्यवाही अर्ध न्यायिक प्रकृति की हैं, जबकि मेरे बेटे का अपराध शुद्ध आपराधिक कार्यवाही को आमंत्रित कर रहा है, इसलिए मेरा मामला भारतीय दंड विधान की धारा 151/107/116 के तहत नहीं हल किया जा सकता है डी.जी.पी. कार्यालय उत्तर प्रदेश राज्य में पुलिस विभाग का निगरानी प्रमुख है जिसके माध्यम से राज्य सरकार राज्य में कानून व्यवस्था की निगरानी और पालन सुनिश्चित करती है। यह डीजीपी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि  लोगों के अधिकारों की रक्षा और देश  के कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सदैव तत्पर रहे  पुलिस अधीक्षक कार्यालय मिर्जापुर में पीआईओ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 की उपधारा 1 के तहत निर्धारित समय के भीतर मांगी गई बिंदुवार जानकारी प्रदान कर सकता है। 1-माननीय पुलिस अधीक्षक जिला-मिर्जापुर पीड़ित आवेदक को बता सकते हैं कि क्या 21 मार्च 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 323/504 के तहत 31/22 के रूप में पंजीकृत एनसीआर को सीआरपीसी की धाराओं में कैसे समाप्त किया जा सकता है। धारा 151/107/116 जो अपराध निवारक उपाय हैं? इसका तात्पर्य यह है कि संबंधित पुलिस और सर्कल अधिकारी का निष्कर्ष और अवलोकन स्वयं अनुचित है और देश  के कानून के विपरीत सक्षम वरिष्ठ रैंक अधिकारी द्वारा ठीक किया जाना चाहिए। कृपया उसी दिन पीड़ित के हजरत इमाम युसूफ संभागीय अस्पताल में किए गए एक्स-रे रिपोर्ट की एक प्रति उपलब्ध कराएं। 2-सीआरपीसी की  धारा 151  पुलिस की शक्ति है जो पुलिस द्वारा अपराध  निवारक कार्रवाई पर विचार करने वाला एक प्रावधान है। उक्त प्रावधान के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा अपराध करने से पहले ही उस अपराध को रोकने के लिए  पुलिस अधिकारी द्वारा लागू किया जा सकता है। 151. संज्ञेय अपराध करने से रोकने के लिए गिरफ्तारी। (1) किसी भी संज्ञेय अपराध को करने के लिए एक डिजाइन बनाने  वाले को  एक पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना, इस तरह के डिजाइन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, अगर यदि  अधिकारी को ऐसा प्रतीत होता है कि अपराध के कमीशन को अन्यथा रोका नहीं जा सकता है तो इस प्रावधान का प्रयोग किया जाता है । सीआर, पी.सी. की धारा 107/116 तब लागू किया जाता है जब शांति भंग की आशंका होती है, परिणामस्वरूप ये दो धाराएं भी निवारक उपाय हैं जो उपरोक्त पुलिस की अक्षमता और भ्र्ष्टाचार को दर्शाती हैं। कृपया सरकार द्वारा जारी परिपत्र, अधिसूचना, कार्यालय ज्ञापन प्रदान करें जो एन.सी.आर की परिणति अपराध निवारक प्रावधान में करने का समर्थन करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 323/504 के तहत और मुक़दमा संख्या  31/22 के रूप में पंजीकृत  अपराध को Cr.P.C की धाराओं के तहत 151/107/116 में परिणित करना जो अपराध निवारक उपाय हैं किस तरह से न्यायोचित है । 3-क्या पीड़ित की मेडिकल जांच रिपोर्ट पुलिस की जांच के अधीन है, निस्संदेह नहीं, अपराधियों द्वारा पीड़ित को गंभीर चोटें कैसे पहुंचाई जा सकती हैं. क्या पुलिस की विश्वसनीयता पर कोई संदेह नहीं है क्योंकि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। पुलिस कोई न्यायाधीश नहीं है जो अ

संदर्भ दिनांक 31-05-2022 पूर्व सन्दर्भ(यदि कोई है तो) 0,0

विभाग गृह एवं गोपन शिकायत श्रेणी पुलिस के विरूद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र

लाभार्थी का विवरण/शिकायत क्षेत्र का

शिकायत क्षेत्र का पता जिला- मिर्ज़ापुर