Title suit is pending but registry and possession was excuted by the S.D.M. Sadar to third party by directing police Vineet Kumar Maurya

 








Arun Pratap Singh <arunpratapsingh904@gmail.com>

Title suit of land is pending before Civil Judge surprising is that opposition sold the land by colluding with the administration and police.

Arun Pratap Singh <arunpratapsingh904@gmail.com>11 September 2021 at 14:42
To: supremecourt <supremecourt@nic.in>, pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, cmup <cmup@up.nic.in>, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, presidentofindia@rb.nic.in, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko@yahoo.co.in, lokayukta@hotmail.com

The matter concerns Sub Divisional Magistrate Sadar district-Mirzapur who made the mockery of the law of land by superseding judgment awaited from the civil court as title suit pending in the court of civil judge district-Mirzapur 
Short submissions of the case are as follows.
1-Please take the clarification of the constitutional bench of the apex court of India.
APPLICATION OF SECTION 52 OF TRANSFER OF PROPERTY ACT – CONDITIONS TO BE SATISFIED
 The Supreme Court in a three Judge Bench in Dev Raj Dogra and others v. Gyan Chand Jain and others[2] construed the meaning of Section 52 of the Transfer of Property Act and laid down following conditions:
1. A suit or a proceeding in which any right to immovable property is directly and specifically in question must be pending;
2. The suit or proceeding should be pending in a Court of competent jurisdiction;
3. The suit or the proceeding should not be a collusive one;
4. Litigation must be one in which right to immovable property is directly and specifically in question;
5. Any transfer of such immovable property or any dealing with such property during the pendency of the suit is prohibited except under the authority of Court, if such transfer or otherwise dealing with the property by any party to the suit or proceeding affects the right of any other party to the suit or proceeding under any order or decree which may be passed in the said suit or proceeding.
2-Following is the grievance submitted by the applicant.
संदर्भ संख्या : 40019921014885 , दिनांक - 11 Sep 2021 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-40019921014885
आवेदक का नाम-Vineet Kumar Mauryaविषय-श्री मान जी दिनांक ०१/०४ /२०२१ की रिपोर्ट जो की जिलाधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी सदर को पृष्ठांकित है और उपजिलाधिकारी सदर ने तहसीलदार सदर को पृष्ठांकित किया है उसमे लिखा गया है की चूकि मामला सिविल न्यायालय में लंबित है इसलिए कोई कार्यवाही संभव नहीं है महोदय प्रार्थी भी यही कह रहा है की जब मामला/ टाइटल विवाद सिविल न्यायालय में लंबित है तो उपजिलाधिकारी सदर द्वारा किस तरह से तीसरे पक्ष को रजिस्ट्री कर दी गई और पुलिस की मदद से जमीन का कब्ज़ा भी दिलवा दिया गया इसलिए शिकायत संख्या:-60000210053983 का निस्तारण मनमानी आख्या लगा कर जिलाधिकारी को गुमराह करते हुए किया गया है इस प्रकरण में खुद उपजिलाधिकारी सदर दोषी है इसलिए इसका निस्तारण उच्च स्तरीय टीम गठित कर किया जाय जब अपराधी ही जज बन जाएगा तो निर्णय कहा से होगा इस प्रकरण का हल उपजिलाधिकारी के क्षेत्राधिकार से बाहर निकाला जाय क्योकि मुख्य दोषी खुद उपजिलाधिकारी सदर ही है उनके विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया जाय और विवेचना क्षेत्राधिकारी स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा कराया जाय और प्रार्थी प्रतिनिधि को भी सुना जाय श्री मान जी न्यायिक और प्रशासनिक निर्णयों का आधार तर्क होता है श्री मान जी प्रथम पेज संलग्नक का तहसीलदार सदर की आख्या दिनांक ०२ मार्च २०२१ है जिसमे उनका निस्तारण का आधार पुलिस द्वारा मामले में दबाव बना कर समझौता कराना और मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए हस्तक्षेप से इंकार है महोदय संलग्नक का द्वितीय पेज क्षेत्राधिकारी सदर की आख्या दिनांक २० दिसंबर २०२० जिसके अनुसार जमीन की रजिस्ट्री एक तीसरे पार्टी को की गई जिसकी मालिकाना तीसरी पार्टी को पुलिस और तहसील में मिलजुल कर किया है गौर करने की बात यह है की मालिकाना का बिबाद दो पक्षों के बीच है जब की तहसील द्वारा तीसरे पक्ष को मालिकाना हक़ प्रदान करके पुलिस के माध्यम से जमीन का कब्ज़ा करा दिया गया और पुलिस द्वारा यह दबाव उपजिलाधिकारी सदर की वजह से बनाया गया अब प्रश्न यह है की भू माफियाओं के दबाव में आकर उपजिलाधिकारी सदर द्वारा नियम विरुद्ध अराजकता पूर्ण कार्य क्यों किया गया प्रार्थी तो न्यायालय के कार्यक्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश करने के लिए उपजिलाधिकारी सदर के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की मांग करता है साथ ही एक उच्च स्तरीय जांच जो ईमानदारी से प्रशासन और भू माफिया के गठजोड़ को अनावरण करे जिनके समक्ष न्यायालय भी नपुंसक बन गया है श्री मान जी महत्वपूर्ण तथ्य यह है की उपजिलाधिकारी सदर द्वारा सिविल न्यायालय की कार्यवाही में अनावश्यक हस्तक्षेप करने और अधिकारिता को दातो तले लेना कौन सा कैनन लॉ न्यायोचित ठहरा रहा है श्री मान जी संलग्नक संलग्नक के पेज ३ व ४ देखे दिनांक20-02-2021 को फीडबैक:-महोदय अविवेक पूर्ण निस्तारण केवल शिकायतों की संख्या को बढाता है दिनांक २५/०१/२०२१ की रिपोर्ट उपजिलाधिकारी की और से प्रस्तुत किया गया है जिसमे उन्होंने यह कह कर मुक्ति पा ली की मामला पुलिस से सम्बंधित है क्यों की पुलिस द्वारा दबाव बना कर सुलह कराया गया है जब की प्रार्थी द्वारा निवेदन का सारांश कुछ इस प्रकार है क्षेत्राधिकारी सदर की रिपोर्ट दिनांक २० दिसंबर २०२० के अनुसार उपजिलाधिकारी के आदेश का पालन करने के क्रम में जमीन का सीमांकन पुलिस द्वारा निश्चित कराया गया और अपराधिक दंड संहिता की धारा १०७/१६ को उभय पक्षों पर लगा करके पुलिस द्वारा शांति कायम किया गया है यह कैसे न्यायोचित है क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस आराजकता को रोकेगी जब मुकदमे का निर्णय सक्षम सिविल न्यायालय में मामले से सम्बंधित जमीन के टाइटल से सम्बंधित लंबित है तो कैसे विपक्ष द्वारा तीसरे पक्ष को जमीन की रजिस्ट्री कर दी जो की संलग्न दस्तावेजों से स्पस्ट है सरकारी तंत्र में कहा ईमानदारी है यदि जमीन का बिबाद न्यायालय में लंबित है तो कैसे प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मिलकर जमीन का मालिकाना हक़ तीसरे पक्ष को दे सकते है अर्थात उपजिलाधिकारी महोदय को आंग्ल भाषा का थोड़ा भी ज्ञान नहीं है इसलिए उन्होंने वही दिसंबर की रिपोर्ट को जनवरी के आख्या में दुहराया है जब की यह प्रकरण खुद उपजिलाधिकारी को ही बिधि विरुद्ध
विभाग -राजस्व एवं आपदा विभागशिकायत श्रेणी -
नियोजित तारीख-07-09-2021शिकायत की स्थिति-
स्तर -तहसील स्तरपद -तहसीलदार
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक -दिनांक को फीडबैक:-
फीडबैक की स्थिति -
संलग्नक देखें -Click here
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!
अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :
क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश/आपत्ति दिनांक आदेश/आपत्ति आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति संलगनक
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 08-08-2021 तहसीलदार-सदर,जनपद-मिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग 06-09-2021 आख्या अपलोड कर सेवा में सादर अवलोकनार्थ प्रेषित है निस्तारित
3-Sir, on one side of the screen S.D.M. Sadar is saying that the matter is subjudice and adjudication is pending consequently no action can be taken on the part of him but on the other side of the screen, he not only executed the registry of the land but also provided the possession by ordering the police concerned to the third party. Even when the dispute of the title suit is pending in the court of civil judge.
4-Sir, what will be done by the civil judge because whatever he had to decide was decided by the S.D.M. Sadar anticipates in a cryptic and mysterious way. For more detail, visit the following links.


O God help the applicant from this anarchy. 

On Sun, 13 Dec 2020 at 18:42, Arun Pratap Singh <arunpratapsingh904@gmail.com> wrote:
A petition under Article 32 of the constitution of India to curb the blatant abuse of power and position by the concerned staff of registries later on by the staffs of the Tahsil Sadar and police in the favour of land grabbers in the district-Mirzapur.
The matter concerns the encroachment of jurisdiction of court by the police and administration of District-Mirzapur, State-Uttar Pradesh
To 
                                                    Hon'ble Chief justice of India / companion judges 
                                                     Supreme Court of India, New Delhi
Subject-Police and concerned staff of the administration took under teeth the process of court and decided the title dispute pending in the court of civil judge as litigation number-881 of year 2016 in the district court Mirzapur.
Short submissions of the case are as follows.
1-Aforementioned litigation is pending at the court of civil judge junior division in the district court Mirzapur as title dispute between the parties.
2-During the pendency of the litigation and adjudication in the matter awaited, opposition did the registry of the impugned land to the third party quite obvious from the attached PDF document.
3-Registery of the land, concerned staff executed when the adjudication is pending and staff of Tahsil Sadar ratified it arbitrarily.
4-Applicant knew about this forged execution of registry of land on 16/08/2019 consequently his mother Rampatti filed civil suit Case number-1001 of the year 2019 in the same court in which adjudication of the title suit is pending. 
5-Here matter of fact is that Kotwali Dehat, District-Mirzapur, State-Uttar Pradesh creating undue pressure on the family of the applicant to sign on the papers arbitrarily dictated by them and scripted by the constables and humiliate family members if they did not follow them. 
6-Sir such practices followed on the ground of forged execution of registry which adjudication is also pending ipso facto.
7-Here accountability of the concerned staff of registries, staff of Tahsil Sadar and staff of police Kotwali Dehat, District-Mirzapur, concerned accountable public functionaries may check and fix the accountability in the wide public interest and curb the travesty of justice. 
8-Think about the gravity of situation, what remains to adjudicate for the civil judge if conspirators cum lawbreakers succeeds in its demon plan.  
                                                           खुदा भी आसमाँ से जब जमी पे देखता होगा |

             इस मेरे प्यारे देश को क्या हुआ सोचता होगा||

This is a humble request of your applicant to you, Hon’ble Sir that how can anyone justify to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos arbitrarily by making the mockery of the law of land? There is the need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray for you, Hon’ble Sir.

Date-13/12/2020            Yours sincerely

                              Vineet Maurya S/O Bhairo Prasad Maurya, Mobile number-7887200402Tahsil-Sadar, Police station-Kotwali Dehat, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001. 


1 Comments

Whatever comments you make, it is your responsibility to use facts. You may not make unwanted imputations against any body which may be baseless otherwise commentator itself will be responsible for the derogatory remarks made against any body proved to be false at any appropriate forum.

  1. Sir, on one side of the screen S.D.M. Sadar is saying that the matter is subjudice and adjudication is pending consequently no action can be taken on the part of him but on the other side of the screen, he not only executed the registry of the land but also provided the possession by ordering the police concerned to the third party. Even when the dispute of the title suit is pending in the court of civil judge.

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