google-site-verification: google652ee2e18330a276.html Yogi as anti-corruption crusader: Why Government of Uttar Pradesh is procrastinating in taking action against S.D.M. Sadar colluding with land mafia?

Monday, 15 March 2021

Why Government of Uttar Pradesh is procrastinating in taking action against S.D.M. Sadar colluding with land mafia?

 










Grievance Status for registration number : PMOPG/E/2021/0191083

Grievance Concerns To
Name Of Complainant
Vineet Maurya
Date of Receipt
15/03/2021
Received By Ministry/Department
Prime Ministers Office
Grievance Description
Redressal of the grievance is done on the basis of the merit of the contents of the submitted grievance and when the wrongdoing was made by the sub divisional magistrate Sadar then how the grievances can be redressed by the tehsildar Sadar who is the subordinate of the sub divisional magistrate Sadar? Whether the Government of Uttar Pradesh takes action against the land mafia in such a 3rd grade standard manner?
संदर्भ संख्या : 40019920025864 , दिनांक - 14 Mar 2021 तक की स्थिति आवेदनकर्ता का विवरण : शिकायत संख्या:-40019920025864 आवेदक का नाम-Vineet Kumar Maurya श्री मान जी न्यायिक और प्रशासनिक निर्णयों का आधार तर्क होता है श्री मान जी प्रथम पेज संलग्नक का तहसीलदार सदर की आख्या दिनांक ०२ मार्च २०२१ है जिसमे उनका निस्तारण का आधार पुलिस द्वारा मामले में दबाव बना कर समझौता कराना और मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए हस्तक्षेप से इंकार है महोदय संलग्नक का द्वितीय पेज क्षेत्राधिकारी सदर की आख्या दिनांक २० दिसंबर २०२० जिसके अनुसार जमीन की रजिस्ट्री एक तीसरे पार्टी को की गई जिसकी मालिकाना तीसरी पार्टी को पुलिस और तहसील में मिलजुल कर किया है गौर करने की बात यह है की मालिकाना का बिबाद दो पक्षों के बीच है जब की तहसील द्वारा तीसरे पक्ष को मालिकाना हक़ प्रदान करके पुलिस के माध्यम से जमीन का कब्ज़ा करा दिया गया और पुलिस द्वारा यह दबाव उपजिलाधिकारी सदर की वजह से बनाया गया अब प्रश्न यह है की भू माफियाओं के दबाव में आकर उपजिलाधिकारी सदर द्वारा नियम विरुद्ध अराजकता पूर्ण कार्य क्यों किया गया प्रार्थी तो न्यायालय के कार्यक्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश करने के लिए उपजिलाधिकारी सदर के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की मांग करता है साथ ही एक उच्च स्तरीय जांच जो ईमानदारी से प्रशासन और भू माफिया के गठजोड़ को अनावरण करे जिनके समक्ष न्यायालय भी नपुंसक बन गया है श्री मान जी महत्वपूर्ण तथ्य यह है की उपजिलाधिकारी सदर द्वारा सिविल न्यायालय की कार्यवाही में अनावश्यक हस्तक्षेप करने और अधिकारिता को दातो तले लेना कौन सा कैनन लॉ न्यायोचित ठहरा रहा है श्री मान जी संलग्नक संलग्नक के पेज ३ व ४ देखे दिनांक20-02-2021 को फीडबैक:-महोदय अविवेक पूर्ण निस्तारण केवल शिकायतों की संख्या को बढाता है दिनांक २५०१२०२१ की रिपोर्ट उपजिलाधिकारी की और से प्रस्तुत किया गया है जिसमे उन्होंने यह कह कर मुक्ति पा ली की मामला पुलिस से सम्बंधित है क्यों की पुलिस द्वारा दबाव बना कर सुलह कराया गया है जब की प्रार्थी द्वारा निवेदन का सारांश कुछ इस प्रकार है क्षेत्राधिकारी सदर की रिपोर्ट दिनांक २० दिसंबर २०२० के अनुसार उपजिलाधिकारी के आदेश का पालन करने के क्रम में जमीन का सीमांकन पुलिस द्वारा निश्चित कराया गया और अपराधिक दंड संहिता की धारा १०७१६ का उपयोग पक्षों पर लगा करके पुलिस द्वारा शांति कायम किया गया है यह कैसे न्यायोचित है क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस आराजकता को रोकेगी जब मुकदमे का निर्णय सक्षम सिविल न्यायालय में मामले से सम्बंधित जमीन के टाइटल से सम्बंधित लंबित है तो कैसे विपक्ष द्वारा तीसरे पक्ष को जमीन की रजिस्ट्री कर दी जो की संलग्न दस्तावेजों से स्पस्ट है सरकारी तंत्र में कहा ईमानदारी है यदि जमीन का बिबाद न्यायालय में लंबित है तो कैसे प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मिलकर जमीन का मालिकाना हक़ तीसरे पक्ष को दे सकते है अर्थात उपजिलाधिकारी महोदय को आंग्ल भाषा का थोड़ा भी ज्ञान नहीं है इसलिए उन्होंने वही दिसंबर की रिपोर्ट को जनवरी के आख्या में दुहराया है जब की यह प्रकरण खुद उपजिलाधिकारी को ही बिधि विरुद्ध कार्यवाही करने का दोषी मानता है और आरोप खुद उपजिलाधिकारी के विरुद्ध है क्यों की पुलिस की कार्यवाही उपजिलाधिकारी के आज्ञा के अधीन है इसलिए पुलिस दोषी नहीं है बल्कि न्यायाल के क्षेत्राधिकार में उपजिलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण किया गया है भू माफिया से साथ मिलकर जो की भ्रष्टाचार को दर्शाता है
Grievance Document
Current Status
Grievance Received
Date of Action
15/03/2021
Officer Concerns To
Forwarded to
Prime Ministers Office
Officer Name
Shri Ambuj Sharma
Officer Designation
Under Secretary (Public)
Contact Address
Public Wing 5th Floor, Rail Bhawan New Delhi
Email Address
ambuj.sharma38@nic.in
Contact Number
011-23386447

5 comments:

  1. यह प्रकरण खुद उपजिलाधिकारी को ही बिधि विरुद्ध कार्यवाही करने का दोषी मानता है और आरोप खुद उपजिलाधिकारी के विरुद्ध है क्यों की पुलिस की कार्यवाही उपजिलाधिकारी के आज्ञा के अधीन है इसलिए पुलिस दोषी नहीं है बल्कि न्यायाल के क्षेत्राधिकार में उपजिलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण किया गया है भू माफिया से साथ मिलकर जो की भ्रष्टाचार को दर्शाता है

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  2. Now the matter has been submitted before the prime minister office and this question arises that whether prime minister office will take appropriate action in the matter and direct the Government of Uttar Pradesh to take action against the wrongdoer sub divisional magistrate Sadar who had made the mockery of the law of land? Whether a government running with the help of bureaucrats can take action against the wrongdoer bureaucrats if there is no transparency and accountability in the public system?

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  3. Only to say that I am providing good governance, a bad governance cannot be good governance but it is most unfortunate that there is rampant corruption in the government machinery and corruption cannot provide good governance so so they must control the corruption from the public system and from this post it is quite obvious that sub divisional magistrate is playing negative role and misusing his post blatantly.

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  4. Whether to overlook the matter concerns the deep rooted corruption is honesty if not how the public functionaries in the Government of Uttar Pradesh are honest? How the inconsistent and arbitrary reply to the grievances on the public grievance portal of the Government of India by the staff of the Government of Uttar Pradesh is justified?

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  5. Here rules are superseded by the arbitrariness of the accountable public functionaries. If adjudication was pending before the Civil Court in the court of civil judge how the registry of the land was carried out in the favour of third party undoubtedly it is mockery of the law of land.

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